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Showing posts from May, 2026

क्या विकास के नाम पर हम विनाश के रास्ते पर हैं? पढ़िए हमारा वैश्विक घोषणापत्र | Co-Earth Movement | Develish One Foundation

वैश्विक घोषणापत्र: "को-अर्थ" आंदोलन (The Co-Earth Movement) Develish One Foundation डेवलिश वन फाउंडेशन (CIN: U88900UP2025NPL220764) Ref/App No: D1F/LTR/2026/003 Date: 27 May 2026 ☑ वैश्विक घोषणापत्रः "को-अर्थ" आंदोलन (The Co-Earth Movement) प्रिय वैश्विक नागरिकों, इस दुनिया का कोई भी इंसान या जीव जन्तु जीना तो चाहता है मगर वो सब कुछ बिना किसी की मेहनत के सोचता है कि उसके जीने के लिए जितनी भी आवश्यक चीज़ें हैं वो बैठे बिठाए...

साल 2026 में 'एल नीनो' (El Niño) का संकट: क्यों तप रही है हमारी धरती और क्या है इसका समाधान?

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब किताबों या चर्चाओं का विषय नहीं रहा, यह हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का एक कड़वा सच बन चुका है। साल 2026 में हम सब जिस रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी, सूखे और मौसम के बदलते मिजाज का सामना कर रहे हैं, उसके पीछे प्रकृति की एक बड़ी हलचल है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'एल नीनो' (El Niño) कहा जाता है। एक पर्यावरण संस्था के रूप में, Develish One Foundation का यह मानना है कि जब तक हम इस संकट की जड़ को नहीं समझेंगे, तब तक हम इसका मुकाबला नहीं कर पाएंगे। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि एल नीनो क्या है, 2026 में इसका क्या असर हो रहा है और हम मिलकर इसे कैसे ठीक कर सकते हैं। 1. एल नीनो (El Niño) क्या है? (आसान भाषा में) सरल शब्दों में कहें तो, एल नीनो एक प्राकृतिक घटना है जो प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में घटती है। जब वहाँ के समुद्र की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, तो इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। हवाओं का रुख बदलना: समुद्र के गर्म होने से दुनिया भर में चलने वाली हवाओं का चक्र बदल जाता है। भारत पर असर: इसके कारण भारत में आने वाला...

प्रगति के नाम पर प्रकृति का विनाश: एक कड़वी हकीकत Is this development or disaster?

पिछले एक दशक में हमारे देश ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और सड़कों के जाल में अभूतपूर्व प्रगति की है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसा स्याह सच छुपा है जिसे हम लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। 'Develish One Foundation ' देश के इस घटते 'ग्रीन कॉरिडोर' और कागजी वनीकरण की नीतियों पर गहरा सरोकार व्यक्त करता है।  1. 10 साल पहले बनाम आज: आंकड़े क्या कहते हैं? 10 साल पहले (2016 के आसपास) : जब देश में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) या राज्यीय मार्गों का चौड़ीकरण शुरू नहीं हुआ था, तब प्रति 1 किलोमीटर के दायरे में औसतन 400 से 600 तक घने, पुराने और विशाल पेड़  (जैसे पीपल, नीम, बरगद, महुआ और आम) हुआ करते थे। ये सड़क किनारे चलने वालों को छांव और पर्यावरण को शुद्ध हवा देते थे। आज की स्थिति (2026) : इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर पिछले 10 सालों में करोड़ों पेड़ काटे गए। सरकार की रिपोर्टों के अनुसार, 'Compensatory Afforestation' (समानुपातिक वनीकरण) के तहत काटे गए 1 पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने का दावा किया जाता है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आज प्रति 1 किलोमीटर की सड़क पर म...

विकास या विनाश? ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और हमारी सांसे: Develish One Foundation की एक गहरी पड़ताल Great Nicobar Mega Project

विकास की अंधी दौड़ में जब इंसान प्रकृति के सबसे अनमोल खजाने पर कुल्हाड़ी चलाने लगे, तो यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बन जाता है। भारत के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित **ग्रेट निकोबार द्वीप समूह** इस समय एक ऐसे ही चौराहे पर खड़ा है। सरकार की लगभग ₹72,000 करोड़  की 'ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट' (Great Nicobar Mega Project) योजना को लेकर पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और आम जनता में भारी चिंता है। Develish One Foundation  एक पर्यावरण-अनुकूल समाज की वकालत करता है, और हमारा मानना है कि देश की सुरक्षा और आर्थिक तरक्की जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी इस धरती की सांसे भी हैं। आइए, इस पूरे मामले को बहुत गहराई से और प्रामाणिक तथ्यों के साथ समझते हैं।  ग्रेट निकोबार की जैव-विविधता क्यों है इतनी अनमोल? ग्रेट निकोबार केवल ज़मीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे संवेदनशील और समृद्ध इकोसिस्टम में से एक है। इसे 'गैलापागोस ऑफ एशिया'  भी कहा जाता है। बायोस्फीयर रिजर्व और नेशनल पार्क : यह द्वीप एक घोषित 'बायोस्फीयर रिजर्व' है। इसमें ...

शिक्षा का 'पिरामिड संकट': सरकारी आंकड़े बयां कर रहे हैं हमारे स्कूलों की कड़वी सच्चाई

जब हम भारत के भविष्य की बात करते हैं, तो हमारी नज़रें सीधे हमारे स्कूलों और कक्षाओं की ओर जाती हैं। हाल ही में नीति आयोग (NITI Aayog) और शिक्षा मंत्रालय की यूडाइस प्लस (UDISE+) रिपोर्ट ने भारतीय स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ ऐसे चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं, जिन्हें जानना हर नागरिक और अभिभावक के लिए बेहद जरूरी है। यह रिपोर्ट हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी कड़वी सच्चाई को सामने लाती है, जिसे नीति आयोग ने "पिरामिड संकट" (Pyramid Problem)  कहा है। Develish One Foundation  हमेशा से बच्चों के समग्र विकास और बुनियादी सुधारों के लिए काम करता रहा है। आइए, इन आधिकारिक आंकड़ों के ज़रिए समझने की कोशिश करते हैं कि हमारी शिक्षा व्यवस्था आज कहाँ खड़ी है।  आंकड़ों की नज़र में: भारतीय स्कूली शिक्षा का विशाल ढांचा भारत की स्कूली शिक्षा दुनिया की सबसे बड़ी प्रणालियों में से एक है, लेकिन इसके आंकड़े जितने बड़े हैं, इसकी चुनौतियाँ भी उतनी ही गहरी हैं: * कुल स्कूल:  भारत में लगभग 14.8 लाख (1.48 Million)  स्कूल हैं। इनमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्क...

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग: क्यों Develish One Foundation खड़ा है हर NEET एस्पिरेंट के साथ?

एक छात्र जब दिन-रात एक करके, अपनी नींद, चैन और खुशियाँ दांव पर लगाकर NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करता है, तो उसकी आँखों में सिर्फ एक सपना होता है— डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना और अपने माता-पिता का नाम रोशन करना।  लेकिन जब उनकी सालों की कड़ी मेहनत पर पेपर लीक करने वाले भ्रष्ट लोग और 'कोचिंग माफिया' पानी फेर देते हैं, तो वह सिर्फ एक परीक्षा के पेपर का लीक होना नहीं होता, बल्कि इस देश के लाखों बच्चों के भविष्य, उनके भरोसे और उनकी उम्मीदों का कत्ल होता है। हाल ही में NEET परीक्षा को लेकर जो भ्रष्टाचार सामने आया है—जहाँ पेपर लीक सिंडिकेट्स ने लाखों रुपयों में पेपर बेचे और योग्य छात्रों के हक पर डाका डाला—उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। Develish One Foundation इस भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी ताकत से छात्रों के साथ खड़ा है।  हम इस लचर व्यवस्था की कड़ी निंदा करते हैं और न्याय की इस लड़ाई में छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। यह सिर्फ एक 'लीक' नहीं, छात्रों के जज्बात से खिलवाड़ है पेपर लीक होने और उसके बाद पैदा हुई अनिश्चितता ने छात्रों को जिस मानसिक तनाव (Men...